संवाददाता शिखर संवाद बदायूं -
"30 हजार दो, जच्चा-बच्चा सुरक्षित पाओ" अस्पताल के इस झूठे वादे पर भरोसा कर शेखूपुर के अमित ने अपनी 25 वर्षीय पत्नी सुमन को भर्ती कराया था। लेकिन किसे पता था कि जिंदगी की उम्मीद में रखी गई चौखट ही मौत का दरवाजा बन जाएगी!अप्रशिक्षित स्टाफ की लापरवाही और अंधाधुंध इंजेक्शनों ने सुमन की सांसे छीन लीं। जब घर में गूंजनी थीं किलकारियां, तब रोने-बिलखने की चीखों से अस्पताल गूंज उठा। बदहवास परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के खिलाफ जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल को सील करने की मांग की है। जिससे एक और सुमन इस अस्पताल भेंट न चढ़े।
दरअसल 15 जुलाई को शहर के शेखूपुर रोड स्थित रहनुमा कॉसमॉस अस्पताल में भर्ती कराई गई सुमन की रविवार को अचानक हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि सही इलाज देने के बजाय स्टाफ गैर-जिम्मेदाराना तरीके से इंजेक्शन लगाता रहा। हालत बेहद गंभीर होने के बावजूद उसे किसी बड़े अस्पताल रेफर नहीं किया गया, जिससे सुमन ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल को सील करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि बिना योग्य डाक्टरों वाले इस नर्सिंग होम में पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं, पर स्वास्थ्य विभाग आंखे मूंदे बैठा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। मामले पर बदायूं के सीएमओ विकास कुमार शर्मा ने कहा कि अस्पताल के रजिस्ट्रेशन और सुविधाओं की जाँच कराई जा रही है। फर्जीवाड़ा पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई होगी, वहीं पुलिस भी मामले की पड़ताल कर रही है।


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