Bisauli Assembly Elections : जिले की बिसौली विधानसभा में सियासी पारा चढ़ चुका है। सपा विधायक आशुतोष मौर्य के दिल और दल के बीच बढ़ती दूरियों ने नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद अब चर्चा है कि भाजपा में शामिल हो चुकीं उनकी पत्नी और पूर्व चेयरमैन सुषमा मौर्य आगामी चुनाव में ताल ठोंक सकती हैं। क्या यह पावर शिफ्ट बिसौली की राजनीति की दिशा बदल देगा? अपनों के बीच शुरू हुई यह बिसात बेहद दिलचस्प हो चली है।
बिसौली विधानसभा, जो लंबे समय से हाई-प्रोफाइल राजनीति का केंद्र रही है, वहां इस बार गोटियां नए अंदाज में फिट की जा रही हैं। सपा विधायक आशुतोष मौर्य उर्फ राजू भले ही कागजों पर समाजवादी हैं, लेकिन उनकी सक्रियता और पारिवारिक झुकाव ने उन्हें अर्ध-भाजपाई की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। अप्रैल 2024 में उनकी पत्नी सुषमा मौर्य और बहन मधु चंद्रा के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही बिसौली की सियासत में हलचल तेज है।
सुषमा मौर्य राजनीति के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। बिल्सी नगर पालिका की पूर्व चेयरमैन के रूप में उनका अपना एक राजनीतिक रसूख रहा है। चर्चा है कि भाजपा, आशुतोष मौर्य को सपा विधायक होने के कारण भले ही टिकट न दे, लेकिन एक सक्रिय सदस्य के रूप में सुषमा मौर्य पर दांव खेल सकती है। आशुतोष मौर्य भी पर्दे के पीछे से अपनी पत्नी के पक्षधर बनकर भाजपा की राह आसान कर सकते हैं।
इस संभावित बदलाव को भांपते हुए सुषमा मौर्य ने क्षेत्र में सघन जनसंपर्क शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व विधायक कुशाग्र सागर भी मैदान में डटे हुए हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। यदि सुषमा मौर्य को भाजपा से टिकट मिलता है, तो बिसौली में कुशाग्र बनाम सुषमा का मुकाबला देखने को मिल सकता है। एक तरफ पारिवारिक विरासत है, तो दूसरी तरफ कुशाग्र सागर की जमीनी सक्रियता। कुल मिलाकर, बिसौली में 'एक वोट' से शुरू हुई क्रॉस वोटिंग की कहानी अब सीधे सत्ता के नए दावेदारों तक पहुंच गई है।

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