देवेश कुमार मिश्रा, संपादक
शिखर संवाद ब्यूरो- जयपुर की गलियों से निकलकर उत्तर प्रदेश पुलिस की दहलीज पर अपनी धाक जमाने वाली अंकिता शर्मा की कहानी केवल एक आइपीएस अधिकारी की नहीं, बल्कि नारी शक्ति के उस अटूट संकल्प की है जो बाधाओं को अवसर में बदलना जानती है। 23 जुलाई 1992 को अशोक कुमार शर्मा के आंगन में जन्मी अंकिता ने जब इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की बारीकियों को समझा, तभी उनके मन में समाज की अव्यवस्थाओं को सुधारने का अंकुर फूट चुका था। 2018 बैच की इस प्रतिभावान आईपीएस अधिकारी ने साबित कर दिया कि वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय के लिए अडिग रहने की शपथ है। इसके बाद जब उन्हें बदायूं का नया पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है, तो यह उनके अब तक के निष्पक्ष और निर्भीक करियर की एक और गौरवशाली उपलब्धि है।
संघर्ष, सेवा और शौर्य जीती जागती मिसाल हैं अंकिता शर्मा
अंकिता शर्मा का व्यक्तित्व तकनीकी कौशल और प्रशासनिक कठोरता का एक दुर्लभ संगम है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने जटिल समस्याओं को सुलझाने का जो हुनर सीखा, उसे उन्होंने खाकी पहनकर अपराधियों के खिलाफ अपना अस्त्र बना लिया। उनके करियर का हर पड़ाव एक नई चुनौती लेकर आया, लेकिन अंकिता ने अपने दृढ़ निश्चय से उसे सफलता की कहानी में तब्दील कर दिया।
नोएडा और कानपुर में न्याय की प्रखर आवाज बनी यह महिला आईपीएस
नोएडा में तैनाती के दौरान उन्होंने मिशन शक्ति के माध्यम से महिलाओं के प्रति समाज के नजरिए को बदलने का काम किया। उन्होंने न केवल अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा, बल्कि पीड़ित महिलाओं के मन में पुलिस के प्रति विश्वास की अलख भी जगाई। कानपुर कमिश्नरेट में डीसीपी दक्षिण के पद पर रहते हुए उनकी कार्यशैली ने सबको चौंका दिया। हत्या और लूट जैसी जघन्य वारदातों का खुलासा हो या यातायात की उलझी हुई गुत्थियों को सुलझाना, अंकिता ने हर मोर्चे पर अपनी योग्यता सिद्ध की। उनके नेतृत्व में हुए हाफ एनकाउंटर इस बात का प्रमाण थे कि अपराधियों के लिए उनके राज में कोई जगह नहीं है।
कासगंज के बाद अब बदायूं पुलिस को मिला एक निर्भीक नेतृत्व
कासगंज में पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने 22 दिसंबर 2024 से कानून का राज स्थापित किया। संवेदनशील इलाकों में खुद पैदल गश्त करना और जनता के बीच जाकर उनका सुझाव लेना उनकी कम्युनिटी पुलिसिंग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अब बदायूं जैसे चुनौतीपूर्ण जिले की कमान संभालना उनके करियर की अग्निपरीक्षा है, जिसे वे अपनी ईमानदारी और तेजतर्रार छवि से फतह करने को तैयार हैं। अंकिता शर्मा का यह सफर उन करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो रूढ़ियों को तोड़कर खाकी के माध्यम से राष्ट्र सेवा का सपना देखती हैं। उनकी कार्यशैली स्पष्ट संदेश देती है कि अपराध के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता और न्याय के प्रति पूर्ण समर्पण।

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