अस्पताल के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर फर्जी डाक्टरी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुकदमा दर्ज करने को मजबूर।


 जिला अस्पताल में एक्स-रे रूम में हो रहे एक्सरों में जमकर धांधलेबाजी की जा रही है। यहां लड़ाई झगड़े वाले मरीजों के एक्स-रे कराने में लोग बर्बाद हो रहे हैं। यहां बिना रुपए लिए टूटी हड्डी भी जुड़ी हुई दिखाई जाती है और रुपए लेने के बाद बिना चोट के भी हड्डी तोड़ मोटी रकम लेकर फर्जी रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। जिससे निर्दोषों को बेवजह सलाखों के पीछे पुलिस को भेजना पड़ रहा है। लड़ायी झगड़े के अगर एक दिन में 100 मुकदमे जिले में दर्ज हों तो यह साफ है कि 90 फीसदी मुकदमा जिला अस्पताल के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर फर्जी डाक्टरी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस दर्ज करने को मजबूर हो रही है। पुलिस के सामने बंदिश है कि डाक्टरी रिपोर्ट को चैलेंज नहीं कर सकती। इसी तरह का खेल पिछले कई सालों से जिला अस्पताल के एक्स-रे रूम में खेला जा रहा है। यहां मेडिकोलीगल कराने आये व्यक्ति से उसकी चोट नही पूंछी जाती बल्कि उसकी जेब के दम के बारे में कर्मचारी पूंछते है। अगर सौदा पटती है तो चोट हो या न हो धाराओं में खेल कर दिया जाता है। अगर रुपये नहीं हो तो गोली लगे हुए व्यक्ति की रिपोर्ट में छर्रे तक गायब हो जाते हैं। जिला अस्पताल में तैनात डाक्टर सिर्फ एक्सरे में तैनात कर्मचारियों की बात पर ही रिपोर्ट लगाते हैं। जिसका पैसा डाक्टर पर पहुंच जाता है उसको बिना चोट हड्डी टूटी की रिपोर्ट बनायी जाती है। जिसका चार जगह से हाथ टूटा हो उसकी हड्डी में फैक्चर तक नहीं आता।

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