शाह की गर्जना बेअसर, बहुमत के मात्र चाहिए थे मात्र 54 वोट
शुक्रवार को सदन के भीतर का सियासी घमासान छिड़ गया बिल पर वोटिंग से ठीक पहले गृह मंत्री अमित शाह ने गर्जना के साथ विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि, देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी प्रगति की राह में रोड़ा कौन है। लेकिन शाह की चेतावनी का विपक्षी एकता पर कोई असर नहीं हुआ। जब वोटिंग का फाइनल स्कोरबोर्ड चमका, तो सरकार के पक्ष में केवल 298 वोट थे, जबकि संविधान संशोधन के लिए जादुई आंकड़ा 352 का था। 230 विपक्षियों ने एकजुट होकर सरकार के इस महिला कार्ड को संवैधानिक पेच में फंसा दिया।
इस हार के पीछे परिसीमन और सीटों की संख्या का विवाद सबसे बड़ा कांटा बना। विपक्ष ने लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने के सरकार के गुप्त मंसूबे को गैर लोकतांत्रिक करार दिया। दिलचस्प बात यह रही कि सरकार ने मुख्य बिल गिरने के बाद परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन बिलों को वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किया, यह कहते हुए कि ये सब एक-दूसरे से जुड़े हैं। सदन में जहां शेरो-शायरी और तीखे कटाक्षों के तीर चले, वहीं सदन के बाहर बीजेपी की महिला सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन कर विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया।
मोदी सरकार के 12 साल के बेदाग रिकॉर्ड पर यह पहली खरोंच है। अब देखना यह है कि आगामी चुनावों में यह विफल आरक्षण और विवादित परिसीमन किसका सियासी गणित बिगाड़ता है। क्या सरकार इसे भावनात्मक मुद्दा बनाएगी या विपक्ष इस जीत को लोकतंत्र की रक्षा के रूप में भुनाएगा?

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