राजनीति संवाददाता। शिखर संवाद
Badaun Politics : जनपद के सियासी गलियारों में कल एक बेहद दिलचस्प और विरल दृश्य जीवंत होने जा रहा है, जहां धुर विरोधी विचारधाराएं एक ही मंच पर कंधे से कंधा मिलाए नजर आएंगी। मौका है बदायूं से दिल्ली के बीच बहुप्रतीक्षित इंटरसिटी ट्रेन के शुभारंभ का। रेलवे विभाग ने इस भव्य आयोजन के लिए सपा सांसद आदित्य यादव और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा को एक साथ आमंत्रित कर सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। विकास की इस नई रफ़्तार के बीच अब श्रेय की राजनीति की जंग भी तेज हो गई है।
विकास की पटरी और दावों का जंक्शन, देखना होगा दिलचस्प
रेलवे विभाग भले ही सोमवार को पटरी पर ट्रेन उतारने की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा हो, लेकिन जनता के बीच इस ट्रेन के 'जनक' को लेकर असमंजस का कोहरा अभी भी घना है। भाजपा खेमा पूरी प्रखरता के साथ यह दावा ठोक रहा है कि केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा के लंबे समय के भगीरथ प्रयासों और सतत पैरवी का ही यह सुखद परिणाम है। भाजपा समर्थकों के अनुसार, यह मोदी सरकार के संकल्पों की सिद्धि है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी इस उपलब्धि को सांसद आदित्य यादव के युवा नेतृत्व और संसद में बुलंद की गई उनकी आवाज का नतीजा बता रही है। सपा का तर्क है कि सदन के पटल पर बदायूं की पीड़ा को आदित्य यादव ने प्रमुखता से रखा, जिसके बाद ही दिल्ली की राह आसान हो सकी।
एक मंच पर दिखेंगे दो पार्टीयों के सिपहसालार
सोमवार का दिन केवल एक ट्रेन की रवानगी का गवाह नहीं बनेगा, बल्कि यह जिले की राजनीति के दो ध्रुवों के मिलन का ऐतिहासिक क्षण भी होगा। यदि आदित्य यादव और बीएल वर्मा एक ही सोफे पर विराजमान होते हैं, तो मंच का 'बॉडी लैंग्वेज' और नेताओं की मुस्कुराहटों के पीछे छिपे राजनीतिक कटाक्ष देखने लायक होंगे।
यह नजारा केवल एक रेल सेवा की शुरुआत नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले जनता के दिल में क्रेडिट की सीट पक्की करने की जद्दोजहद है। अब देखना यह होगा कि जब हरी झंडी दिखाई जाएगी, तो बदायूं की जनता इस विकास का असली इंजन किसे मानती है। सियासत की इस बिसात पर शह और मात का खेल तो जारी रहेगा, लेकिन फिलहाल बदायूं की जनता दिल्ली के इस सफर के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

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